दिल्ली-एनसीआर का प्रदूषण गुणवत्ता में गिरावट के आसार

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हल्की बारिश और हवा के रुख में बदलाव से सोमवार को दिल्ली-एनसीआर के सभी शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक में बड़ी गिरावट देखने को मिली। राजधानी में 214 अंकों के सुधार के साथ वायु गुणवत्ता गंभीर से खराब स्तर में पहुंच गई। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) रविवार को 435 था, जो सोमवार को 221 रिकॉर्ड किया गया। नवंबर के पहले 16 दिनों में यह दूसरा मौका है, जब वायु गुणवत्ता इतनी बेहतर हुई है। सफर का पूर्वानुमान है कि हवा की चाल थमने से 18 नवंबर को एक बार फिर वायु गुणवत्ता सूचकांक में गिरावट आ सकती है। दिल्ली-एनसीआर की हवा में प्रदूषण की कमी रविवार की बूंदाबांदी और हवाओं के रुख में बदलाव से आई। हल्की बारिश से हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व जमीन पर आ गिरे। वहीं, इसी बीच सतह पर चलने वाली हवाओं की दिशा भी उत्तर-पूर्वी हो गई। इसके अलावा पराली का धुआं भी दिल्ली-एनसीआर तक नहीं पहुंच सका। सोमवार को दिल्ली के प्रदूषण में इसका हिस्सा महज एक फीसदी रहा। तीनों के संयोग से प्रदूषण स्तर में तेजी से गिरावट आई और नवंबर के 16 दिनों में दूसरी बार वायु गुणवत्ता गंभीर श्रेणी से खराब श्रेणी में पहुंच गई। सफर का पूर्वानुमान है कि मंगलवार को हवा की गुणवत्ता में कोई खास बदलाव नहीं होगा। हवा की चाल और दिशा में बदलाव आने से 18 व 19 नवंबर को दुबारा इसमें गिरावट आ सकती है। उस वक्त गुणवत्ता का स्तर बेहद खराब हो सकता है। पराली के धुएं का हिस्सा बढ़ता है तो हवा की गुणवत्ता ज्यादा खराब हो सकती है। सीपीसीबी की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर का पहला पखवाड़ा प्रदूषण के लिहाज से दिल्ली-एनसीआर पर भारी रहा। पहले 16 दिनों में आठ दिन वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में रहा। दो दिनों तक तो सूचकांक 475 से ऊपर बना रहा। वहीं, छह दिन गुणवत्ता बेहद खराब रही। इस बीच सिर्फ दो दिन ऐसा रहा, जब हवा की गुणवत्ता खराब रही। 16 नवंबर के सूचकांक 221 के साथ दो नवंबर को यह 293 रिकॉर्ड किया। इस लिहाज से पहले 16 दिनों में सबसे साफ हवा सोमवार को रिकॉर्ड की गई। सफर के आंकड़ों के मुताबिक, बेशक तीन सालों में इस बार की दिवाली सबसे प्रदूषित रही, लेकिन हवा की गुणवत्ता में सबसे तेज सुधार भी इसी साल आया है। दिवाली के तीसरे दिन हवा में मौजूद पीएम2.5 का स्तर 100 माइक्त्रसेग्राम प्रति घन मीटर के करीब रहा। जबकि 2018 व 2019 में यह 300 से ऊपर रिकॉर्ड किया गया था। खास बात यह कि इस साल दिवाली से पांच दिन पहले हवा में पीएम 2.5 का स्तर 500 के आस-पास था। वहीं, 2018 में 200 व 2019 में करीब 100 था।

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